तमनाये मुँह फ़ेर लेंगी

तमनाये मुँह फ़ेर लेंगी,
वक़्त की हार के साथ,
ये सोचा न था!
हम तमाशा हुए तुमसे,
तुम रहे फिर भी पाक,
ज़माने ने झुंज कर मुझे,
मुझे पत्थर बनाया है |

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