रेत सा फिसलता हर पल

रेत सा फिसलता हर पल
पानी से बहते जज़्बात
सन्नाटे की गहरी गूंज
फड़फड़ाता हर लम्हा
और, गहरी काली रात
हुआ था दिल कभी निस्बत
तेरे इश्क़ में मेरे प्यार
हम सदके में खुद को ही लूटा चले  |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Scroll To Top