कितना गिर जाता है

कितना गिर जाता है वो शख़्स
जो दूसरे को गिराने की खातिर
हर तीर चलाता है,
और नाकाम हो जाने पर
फिर कोई नयी जंग भिड़ाता है |

दौलत के चमचमाते आईने

दौलत के चमचमाते आईने की क्या बात
हम ख़ुद को देख के भी पहचान न पाये
और वो ख़ुद को सवारते है, इस वहम् में रोज़
कि उनसा कोई दूसरा नहीं जहाँ में |

जब दिन बीत जाता है

जब दिन बीत जाता है,
मैं सोचता हूँ अक्सर,
कि जो तग़ाफ़ुल के लम्हे थे,
उनसे बिखरें हैं मेरे ख़्वाब,
मेरी सोच के हालात…
जो हो गए मेरे हम-नवाज़ |

बारिशों का शोर

बारिशों का शोर, या ये दबी आवाज़
है मेरे दिल में कुछ थर-थराते जज़्बात
हालात कुछ इस कदर बेज़ार
कि यादों में तेरी शक्ल भी धुल गयी |

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