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इश्क़ धड़कता भी रहा

इश्क़ धड़कता भी रहा, इश्क़ महकता भी रहा
तेरी होटों की कपकपाहट में, तेरे बदन की खुशबू में
हर दिन हर रात, दिल अंदर ही अंदर थरकता रहा |

साहिलों का क्या है

साहिलों का क्या है,
मंज़िल सफर से आसान हो,
ये ज़रूरी तो नहीं,
हम तो हर हाल में चलते चले,
कि शायद! अब मुश्किले कम हो |

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