तेरा, मेरा होने में

तेरा, मेरा होने में जो ग़म था
न मैं तेरा होता, न तुम मेरे
न ये ग़िला होता,
न हम होते गुनहगार,
न होते तेरे, तो कुछ न होता,
बस मैं न होता |

कल रात देर तलक

कल रात देर तलक,
हम दोनों ने की बातें बहुत,
सब पुरानी मीठी-मीठी,
यादें थी बहुत |
अब शायद उम्र का वो मोड़,
हम पीछे छोड़ आये,
पर ज़िन्दगी भर की सौगातें,
साथ ले आये हैं बहुत |
चलते चलेंगे,
नाम लिख-लिख के, मंज़िलों पर हम,
और! फिर कभी फुर्सत में,
इक नये मोड़ पे, नयी मंज़िलों पे,
ज़िन्दगी के हिसाब करेंगे बहुत |

वो एक प्याली शाम की

वो एक प्याली शाम की,
और तेरा मेरा साथ,
और कभी तेरा पास न होना,
तो तुझसे रुठने की बात,
अब वो शामें न होंगी…

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