कह रहा था दिल मेरा

कह रहा था दिल मेरा, वो जुनूं नहीं, वो इश्क़ था,
दिल धड़कता रहा, कही कोने में छुपा तेरा एहसास था |

कुछ हुआ था

कुछ हुआ था, पर न जाने क्यूँ न पता चला,
कही ये तेरा साया तो नहीं, जो मेरी रूह से जुड़ गया?

सन्नाटे में गूंजता

सन्नाटे में गूंजता मेरी तन्हाई का एहसास,
सैकड़ों सवाल करता रहा ख़ुद से,
मैं अनजान, था तेरे इश्क़ में,
जो ख़ुद से भी रूबरू न हुआ कभी |

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