अंजान मौसम से तुम आये

अंजान मौसम से तुम आये मेरे क़रीब
तपतपाती गर्मी में सर्द हवा की ठंडक हो कोई
ज़िन्दगी की राह में इक उम्मीद जीने की
मेरी आँखों में चाह भरते सपनो की |

ख़ामोशियों में ढूंडती कुछ अल्फ़ाज़

ख़ामोशियों में ढूंडती कुछ अल्फ़ाज़ ये तन्हाई,
आँखों से झांकती और तुमसे मांगती कुछ जवाब,
सरसराती पत्तिया है या, ये सन्नाटो का है शोर,
कुछ ढूंडती सी रहती है, न जाने ये क्या-
मेरी रूह या तेरी ख़ुश्बू – जो न दिखाई दी कभी |

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