क़सूर वक़्त का होता

kasoor waqt ka hota, to shayad, humein waqt se shiqwa bhi hota,
Tamannao ne yuN ghera ki hum na-chah kar bhi ulajhte chale gaye.

क़सूर वक़्त का होता, तो शायद, हमें वक़्त से शिक़वा भी होता,
तमन्नाओ ने यूँ घेरा कि हम न-चाह कर भी उलझते चले गए |

डरना है या सम्भालना है

Darna hai ya sambhalna hai,
waqt ki thhokar se hum sabko nikalna hai,
Tum khair karo apni gustakh-e-jahaN,
humne to mohabbat-mohabbat mein bhi sab kuchh lutaya hai.

डरना है या सम्भालना है,
वक़्त की ठोकर से हम सबको निकलना है,
तुम ख़ैर करो अपनी गुस्ताख़-ए-जहाँ,
हमने तो मोहब्बत-मोहब्बत में भी सब कुछ लुटाया है |

ता-उम्र हैंरां रहा

Ta-Umra hairaaN raha,
shayad kuchh nahi tha,
shayad tha bhi, par,
main anjaaN raha.

ता-उम्र हैंरां रहा,
शायद कुछ नहीं था,
शायद था भी, पर !
मैं अंजान रहा |

ख़्वाबों का क्या है

khwabo ka kya hai,
bismillah hote hi,
main nikal padta hoon,
zaruri to nahi wo purey ho…

ख़्वाबों का क्या है,
बिसमिल्लाह होते ही,
मैं निकल पड़ता हूँ,
ज़रूरी तो नहीं वो पूरे हो…

अजीब सी थी वो घड़ी

ajeeb si thi wo ghadi,
aur aaj bhi kuchh ajeeb hai,
tu nahi to kya hua,
meri yaadon mein mere kareeb hai…

अजीब सी थी वो घड़ी,
और आज भी कुछ अजीब है,
तू नहीं तो क्या हुआ,
मेरी यादों में मेरे क़रीब है |

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