अफ़सोस! तुम हमें समझ न सके

afsos! tum humein samajh na sakey
afsos, hum bhi rahe tere
afsos, ki kyu kar hai ye rishta
jab tumhe gairo pe hi yaqiN hai.

अफ़सोस! तुम हमें समझ सके
अफ़सोस, हम भी रहे तेरे
अफ़सोस, कि क्यूँ कर है ये रिश्ता
जब तुम्हे ग़ैरों पे ही यक़ीं हैं |

जो देते थे

Jo dete thay mahobbat ka vaasta
pata na tha ki hatho me khanjar liye huey hain….

जो देते थे महोब्बत का वास्ता
पता न था कि हाथो में ख़ंजर लिये हुए हैं |

उम्र भर माँ हमारी

umra bhar maa humari sehti rehti hai
dil mein hazaar mushqiley samete rehti hai

janm se maran tak har subha ki dhoop ke saath
aur raat mein chaand ki chandni si maa, mere qareeb rehti hai

उम्र भर माँ हमारी सहती रहती है
दिल में हज़ार मुश्किलें और राज़ समेटे रहती है

जन्म से मरण तक हर सुबह की धूप के साथ
और रात में चाँद की चांदनी सी माँ, मेरे करीब रहती है

तेरी हँसी, तेरा गुस्सा

teri hasi, tera gussa,
teri daant, aur fatkar
tera pyar, tera dular
khil uthti thi tujhse
ye hawaye sooni-sooni
tum na hoge ab to
hum ruthenge kissey
aur manayega kaun
kabhi khawabo mein milenge
ab humein neend se uthayega kaun.

तेरी हँसी, तेरा गुस्सा,
तेरी डाँट, और फ़टकार
तेरा प्यार, तेरा दुलार
खिल उठती थी तुझसे 
ये हवाएं सुनीसुनी
तुम होगे अब तो
हम रुठेंगे किस्से 
और मनायेगा कौन
कभी ख़्वाबों में मिलेंगे
अब हमें नींद से उठायेंगा कौन

तेरे जाने के बाद

tere jane ke baad hui ye chahat aur gehri
yun taqazo se guzri thi har ghadi ab tak…

तेरे जाने के बाद हुई ये चाहत और गहरी
यूँ तक़ाज़ों से गुज़री थी जो हर घड़ी अब तक

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