न बदलती हैं

न बदलती हैं न मिटती हैं,
ये मेरे हाथो की लकीरे,
इस इलज़ाम से फक्र,
हम उठ नहीं पाते,
कि ज़िन्दगी थी तो इक तोहफा,
हमने ही खुदके हाथो बर्बाद की |

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