कल रात देर तलक

कल रात देर तलक,
हम दोनों ने की बातें बहुत,
सब पुरानी मीठी-मीठी,
यादें थी बहुत |
अब शायद उम्र का वो मोड़,
हम पीछे छोड़ आये,
पर ज़िन्दगी भर की सौगातें,
साथ ले आये हैं बहुत |
चलते चलेंगे,
नाम लिख-लिख के, मंज़िलों पर हम,
और! फिर कभी फुर्सत में,
इक नये मोड़ पे, नयी मंज़िलों पे,
ज़िन्दगी के हिसाब करेंगे बहुत |

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