दीवारोँ से लिपटा

जब दीवारोँ से लिपटा होता हूँ,
जब ख़ामोशी से मैं परेशां,
गुमसुम, उदास,
जवाब मांगता हूँ ज़िन्दगी से,
कि क्यों- ख़ुद ही किया,
खुद को बर्बाद
मैं खुश नहीं- और अब!
नहीं बचे हैं अलफ़ाज़
जो मेरे दर्द को करें बयां |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Scroll To Top