Category Archives: Sad Poetry

रेत सा फिसलता हर पल

रेत सा फिसलता हर पल
पानी से बहते जज़्बात
सन्नाटे की गहरी गूंज
फड़फड़ाता हर लम्हा
और, गहरी काली रात
हुआ था दिल कभी निस्बत
तेरे इश्क़ में मेरे प्यार
हम सदके में खुद को ही लूटा चले  |

ये ज़रूरी तो नही

जब बरसे बारिश
मेरा मन्न भीग जाये
ये ज़रूरी तो नहीं |

सफर में साथ थे जो
मंज़िल तक रहें साथ
ये ज़रूरी तो नहीं |

ज़िन्दगी की बात हो
और मैं जीया हूँ
ये ज़रूरी तो नहीं |

आग बुझी हो
और राख ठंडी हुई हो
ये ज़रूरी तो नहीं |

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