Category Archives: Sad Poetry

न बदलती हैं

न बदलती हैं न मिटती हैं,
ये मेरे हाथो की लकीरे,
इस इलज़ाम से फक्र,
हम उठ नहीं पाते,
कि ज़िन्दगी थी तो इक तोहफा,
हमने ही खुदके हाथो बर्बाद की |

रेत की दीवारे थी

रेत की दीवारे थी,
पानी सा आसमां था,
पत्थरों में साँसे थी,
और तुम्हे हमसे प्यार था!
ख़ुद को और कब तक बहलाये,
अब तब्दीलियाँ लाओ कोई –
हम खुद के गुनेहगार हैं |

बड़े गहरे साये हैं

बड़े गहरे साये हैं जो हक़ीक़त से लगते हैं,
जो लगते हैं बड़े सुथरे, पर हैं बड़े फरेब,
मेरी सोच का समुन्दर जो बस! डूबता ही जाता है,
बड़ा सूना सा आलम है- न ठहरे, न रुके कभी |

तमनाये मुँह फ़ेर लेंगी

तमनाये मुँह फ़ेर लेंगी,
वक़्त की हार के साथ,
ये सोचा न था!
हम तमाशा हुए तुमसे,
तुम रहे फिर भी पाक,
ज़माने ने झुंज कर मुझे,
मुझे पत्थर बनाया है |

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