Category Archives: Sad Poetry

तुम यूँ हँसते रहते हो

tum yuN hastey rehte ho- koi karte ho fareb,
hum tumhe dekhte hain ki khushnuma ho ya udaas.

तुम यूँ हँसते रहते हो – कोई करते हो फ़रेब,
हम तुम्हे देखते हैं कि खुशनुमा हो या उदास |

दीवारोँ से लिपटा

जब दीवारोँ से लिपटा होता हूँ,
जब ख़ामोशी से मैं परेशां,
गुमसुम, उदास,
जवाब मांगता हूँ ज़िन्दगी से,
कि क्यों- ख़ुद ही किया,
खुद को बर्बाद
मैं खुश नहीं- और अब!
नहीं बचे हैं अलफ़ाज़
जो मेरे दर्द को करें बयां |

थकी थी आँखें

थकी थी आँखें और दर्द था छलकता
अपनी ही तड़प में था वो इस क़दर तड़पता
दिल में गहरे घाव थे यूं बिखरा हुआ था वोह
टूटे हों जैसे ख़्वाब उस गहरी रात के तारो की तरह |

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