Category Archives: Sad Poetry

सब्र कब तक करता मैं

sabr kab tak karta main,
tum to bas aazmaye chale gaye,
fasana ban gaya ye ishq,
par tum to bas tadpaye chale gaye.
rehne do ab –
kuchh taluqaat ki zarurat nahi,
hum tanha hi zindagi nibhaye chale gaye.

सब्र कब तक करता मैं,
तुम तो बस आज़माये चले गये,
फ़साना बन गया ये इश्क़,
पर तुम तो बस तड़पाये चले गये |
रहने दो अब –
कुछ तालुक़ात की ज़रूरत नहीं,
हम तनहा ही ज़िन्दगी निभाये चले गये |

तुम्हारी हालत को देख

tumhari haalat ko dekh hum tobaH- tobaH
khud ki haalat pe reham kya kartey –
yu to chahat mehaz ik darya-e-tamanna thi
teri gam mein hum arsa bilakh-bilakh ke roye…

तुम्हारी हालत को देख हम तौबा-तौबा
ख़ुद की हालत पे रहम क्या करते –
यूँ तो चाहत महज़ इक दरया-ए-तमन्ना थी
तेरे ग़म में हम अरसा! बिलख-बिलख के रोये…

सूखी हुई पतियों की सायें-सायें

sukhi hui patiyo ki sayeN-sayeN hoti rahi
hawa bhi kuchh tez-tez roti rahi
hum kab huey thay namm, koi ilm nahi
kya mere saath hi gulistan yu khamosh ho gaya?

सूखी हुई पतियों की सायें-सायें होती रही
हवा भी कुछ तेज़-तेज़ रोती रही
हम कब हुए थे नम, कोई इल्म नहीं
क्या मेरे साथ ही गुलिस्तां यूँ ख़ामोश हो गया?

ता-उम्र हैंरां रहा

Ta-Umra hairaaN raha,
shayad kuchh nahi tha,
shayad tha bhi, par,
main anjaaN raha.

ता-उम्र हैंरां रहा,
शायद कुछ नहीं था,
शायद था भी, पर !
मैं अंजान रहा |

घुटन सी है हर तरफ

ghutan si hai har taraf, meri nazar ki pahoch tak,
main saans bhi nahi le pata, Dil bhi ab dhadakta nahi.

घुटन सी है हर तरफ, मेरी नज़र की पहोंच तक,
मैं सांस भी नहीं ले पाता, दिल भी अब धड़कता नहीं |

 

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