बड़े गहरे साये हैं

बड़े गहरे साये हैं जो हक़ीक़त से लगते हैं,
जो लगते हैं बड़े सुथरे, पर हैं बड़े फरेब,
मेरी सोच का समुन्दर जो बस! डूबता ही जाता है,
बड़ा सूना सा आलम है- न ठहरे, न रुके कभी |

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